हैसियत प्रमाण पत्र (Solvency Certificate) कैसे बनवाएं? जानें पूरी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

अगर आप सरकारी ठेकेदारी (Tender) लेना चाहते हैं या किसी बड़े व्यापारिक सौदे का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपने Solvency Certificate का नाम जरूर सुना होगा। इसे हिंदी में ‘हैसियत प्रमाण पत्र’ कहते हैं। यह दस्तावेज इस बात का प्रमाण होता है कि आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत है और आप संबंधित कार्य के लिए वित्तीय रूप से सक्षम हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अब इसकी प्रक्रिया को काफी पारदर्शी बना दिया गया है। Jansuvidha portal के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आप घर बैठे या तहसील जाकर अपना Solvency Certificate कैसे तैयार करवा सकते हैं और इसमें कौन-कौन से तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी है।

Solvency Certificate क्या होता है?

सरल शब्दों में कहें तो Solvency Certificate एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज है जो किसी व्यक्ति या संस्था की कुल संपत्ति और देनदारियों का मूल्यांकन करने के बाद जारी किया जाता है। यह प्रमाणित करता है कि व्यक्ति के पास कितनी चल और अचल संपत्ति है। जिला प्रशासन या बैंक इसे जारी करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सामने वाला व्यक्ति दिवालिया नहीं है। जब आप किसी सरकारी विभाग में निविदा (Tender) भरते हैं, तो विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आप काम पूरा करने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम हैं या नहीं। यहीं पर Solvency Certificate की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है, जो आपकी साख को बढ़ाता है। दिशा निर्देश पढ़ सकते है

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 1. उपरोक्त प्रमाण पत्र के आवेदन हेतु देय राशि ₹ 100/- + यूजर चार्जेज निर्धारित की गयी है । अतः जनसेवा केंद्र पर ₹ 120/- व सिटीजन पोर्टल के द्वारा ₹ 110/- शुल्क निर्धारित है ।
2.  चल संपत्ति की दशा में सिर्फ उन्ही सम्पत्तियों का मूल्यांकन मान्य होगा जो आवेदक/संस्था के स्वयं के नाम हो । किसी भी तरह की संयुक्त संपत्ति होने की दशा में उस संपत्ति का मूल्यांकन मान्य नहीं होगा ।
 3. चल संपत्ति का कुल स्वीकार्य मूल्यांकन भारमुक्त अचल संपत्ति के कुल मूल्यांकन के आधे से अधिक नहीं होना चाहिए ।
4.  किसी भी तरह के शासकीय देय बकाया होने की दशा में विभागवार देय राशि का विवरण देना अनिवार्य है ।
5.  प्रमाण पत्र की वैधता जारी दिनांक से २ वर्ष के लिए मान्य होगी । किसी भी संपत्ति संबधी स्वामित्व के संशोधन/परिवर्तन की दशा में प्रमाण पत्र पुनः जारी कराने की जिम्मेदारी आवेदक की होगी ।
 6. बंधक सम्पत्तियों का मूल्याकन मान्य नहीं होगा ।
 7. आवेदक अपनी समस्त अचल सम्पत्तियों की जांच एवं मूल्यांकन उत्तर प्रदेश में कार्यरत किसी भी GAV(Government Approved Valuer) से करा सकता है , अन्यथा सभी अचल सम्पत्तियों की जांच तहसील द्वारा की जाएगी ।परन्तु Govt Approved Valuer से जांच के लिए Govt Approved Valuer का इस वेब पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है । (GAV का पंजीकरण प्रारूप – आकार पत्र हैसियत -4 में उपलब्ध है ।)
8. चल संपत्ति के प्रकरण में आवेदक द्वारा चल संपत्ति के मूल्यांकन सम्बन्धी GAV/सक्षम प्राधिकारी द्वारा संपत्ति के मूल्यांकन के समस्त अभिलेख अनिवार्य रूप से आवेदन करते समय ही पोर्टल पर अपलोड किये जायेंगे । इन संग्लग्न अभिलेखों की जांच जिलाधिकारी कार्यालय स्तर पर की जाएगी एवं तदनुसार अचल संपत्ति के मूल्यांकन में उसे जोड़ कर , प्रमाण पत्र जारी करने की कार्यवाही की जाएगी ।
 9.हैसियत प्रमाण पत्र के जारी करने की इकाई जिला होगी अर्थात यदि किसी व्यक्ति की एक से अधिक तहसीलों में संपत्ति है तो जनपद में जिलाधिकारी सभी तहसीलों में संपत्ति है तो जनपद में जिलाधिकारी सभी तहसीलों से आख्या प्राप्त कर जनपद स्तर से एकीकृत हैसियत प्रमाण पत्र जारी करेंगे । अलग – अलग जनपदों के लिए प्रत्येक जनपद से अलग – अलग हैसियत प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा ।
10. हैसियत प्रमाण -पत्र के लिए हैसियत के रूप में यदि बैंक में जमा धनराशि दर्शायी जाती हैं तो वह धनराशि आवेदन के दिनांक से कम से कम तीन माह पहले से बैंक में जमा होनी चाहिए और कार्य पूरा होने तक बैंक में अवश्य जमा रेहनी चाहिए ।
 11.हैसियत प्रमाण -पत्र की वैधता जारी दिननांक से ०२ वर्ष के लिए मान्य होगी | किसी भी संपत्ति सम्बन्धी स्वामित्व के संशोधन में प्रतिवर्तन की दशा में प्रमाणपत्र पुनः जारी करने की जिम्मेदारी आवेदक की होगी ।

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हैसियत प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज (Important Documents)

जब आप Solvency Certificate के लिए आवेदन करने का मन बनाते हैं, तो सबसे पहले अपने दस्तावेजों को दुरुस्त कर लेना चाहिए। Solvency Certificate Online करने के लिए आपको अपनी अचल संपत्ति जैसे जमीन, मकान या दुकान के कागजात (खतौनी या रजिस्ट्री) की जरूरत होती है। इसके अलावा, पहचान पत्र के तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र अनिवार्य हैं। यदि आपके पास बैंक बैलेंस या एफडी (FD) है, तो उसका विवरण भी लगाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में आवेदन के समय आपको एक शपथ पत्र (Affidavit) भी देना होता है जिसमें आप अपनी संपत्ति की घोषणा करते हैं। ध्यान रहे कि Solvency Certificate बनवाने के लिए सभी फोटोकॉपी स्व-प्रमाणित (Self-attested) होनी चाहिए ताकि आवेदन निरस्त न हो।

UP Domicile certificate: निवास प्रमाण पत्र बनाने की पूरी प्रक्रिया

क्रम संख्याव्यक्तिगत (व्यक्ति द्वारा)संस्था (मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा)
1 .आवेदक का फोटोमुख्य कार्यकारी अधिकारी का फोटो
2 .पैन कार्डपैन कार्ड
3 .पते का प्रमाणपते का प्रमाण
4 .आधार कार्ड— —
क्रम संख्यासंपत्ति का प्रकारअभिलेखीय साक्ष्य हेतु दस्तावेज  
 अचल संपत्तिकृषि भूमि की स्थिति में CH 41 व 45 तथा 1359 फ० की प्रमाणित खतौनीसंपत्ति के स्वामित्व का कोई साक्ष्य दर्शायी गयी संपत्ति/भवन भूमि का फोटोग्राफ
6.चल संपत्तिवाहन की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी का मूल्यांकन प्रमाणपत्रबैंक में रखी गयी संपत्ति के लिए बैंक प्राधिकारी से मूल्यांकन प्रमाणपत्र/ बैंक अथवा वित्तीय सस्था में कोई धनराशि हो तो इसके लिए बैंक का नाम /खाता संख्या एवं उसमे रखी धनराशि का विवरण दिया
7.अन्य परिसम्पत्तियों का विवरणअन्य परिसम्पत्तियों के विवरण सम्बंधित प्रमाणपत्र

Solvency Certificate के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

आजकल डिजिटल इंडिया के दौर में Solvency Certificate के लिए ऑनलाइन आवेदन करना सबसे सुविधाजनक विकल्प है। उत्तर प्रदेश में आप ‘e-Sathi’ पोर्टल https://esathi.up.gov.in/ के माध्यम से इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। सबसे पहले आपको पोर्टल पर अपना पंजीकरण करना होगा,

hasiyat parman patra e sathi registration portal

जिसके बाद ‘हैसियत प्रमाण पत्र’ वाले विकल्प का चयन करना पड़ता है।

Solvency Certificate avedan form selection

Apply Online Solvency Certificate की प्रक्रिया 4 चरणों में पूरी होगी-

  • चरण-1  आवेदक का विवरण
  • चरण-2 संपत्ति का विवरण
  • चरण-3 संलग्नकों का विवरण
  • चरण-4 सम्बंधित दस्तावेज

वहां आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी और संपत्ति का पूरा विवरण भरना होता है। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय Solvency Certificate के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान भी डिजिटल माध्यम से किया जाता है। फॉर्म सबमिट होने के बाद आपको एक आवेदन संख्या मिलती है, जिससे आप भविष्य में अपने प्रमाण पत्र की स्थिति (Status) ट्रैक कर सकते हैं।

जांच की प्रक्रिया (Verification Process)

ऑनलाइन आवेदन जमा करने के बाद, आपकी फाइल संबंधित तहसील के तहसीलदार या उप-जिलाधिकारी (SDM) के पास पहुंचती है। वहां से इसे क्षेत्रीय लेखपाल और कानूनगो को जांच के लिए भेजा जाता है। लेखपाल आपकी बताई गई संपत्ति का मौके पर जाकर सत्यापन करता है। वह यह देखता है कि जो जमीन या मकान आपने दिखाया है, वह वास्तव में आपके नाम पर है या नहीं और उसकी बाजार दर (Circle Rate) क्या है। इस वेरिफिकेशन के बाद ही लेखपाल अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजता है। Solvency Certificate जारी करने से पहले प्रशासन Verification Process करके यह सुनिश्चित करता है कि संपत्ति पर कोई विवाद या लोन तो नहीं है, ताकि प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता बनी रहे।

Solvency Certificate जारी होने की समय सीमा और फीस

आमतौर पर Solvency Certificate बनवाने की प्रक्रिया में 15 से 30 दिन का समय लग सकता है। यह समय सीमा सरकारी जांच और रिपोर्ट लगने की गति पर निर्भर करती है। अगर हम फीस की बात करें, तो उत्तर प्रदेश में सरकारी पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने पर नाममात्र का शुल्क देना होता है, लेकिन संपत्ति के मूल्यांकन के आधार पर कुछ अतिरिक्त अदालती शुल्क (Court Fee) भी लग सकता है। एक बार जब प्रशासन संतुष्ट हो जाता है, तो डिजिटल हस्ताक्षर युक्त Solvency Certificate जारी कर दिया जाता है, जिसे आप ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं। यह प्रमाण पत्र आमतौर पर एक निश्चित अवधि (जैसे 6 महीने या 2 साल) के लिए वैध होता है।

हैसियत प्रमाण पत्र बनवाते समय ध्यान रखने वाली बातें

यदि आप चाहते हैं कि आपका Solvency Certificate बिना किसी रुकावट के बन जाए, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। अपनी संपत्ति का विवरण देते समय कभी भी गलत जानकारी न दें, क्योंकि लेखपाल की जांच में पकड़े जाने पर आपका आवेदन निरस्त हो सकता है और आप पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसके अलावा, यदि आपकी संपत्ति संयुक्त (Joint Property) है, तो अन्य हिस्सेदारों की सहमति या एनओसी (NOC) की आवश्यकता पड़ सकती है। Solvency Certificate के लिए आवेदन करते समय हमेशा नवीनतम खतौनी या टैक्स रसीद का ही उपयोग करें। स्पष्ट दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर अधिकारी जल्द ही रिपोर्ट लगा देते हैं और आपका काम समय पर पूरा हो जाता है।

Haisiyat Praman Patra Application Status कैसे देखें?

यदि अपने ई-डिस्ट्रक्ट यूपी पोर्टल के अंतर्गत किसी हैसियत प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है और आप अपने हैसियत प्रमाण पत्र के आवेदन की स्थिति / Track Application Status देखने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें-

  • ई-डिस्ट्रक्ट यूपी पर हैसियत प्रमाण पत्र के आवेदन की स्थिति को देखने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.
  • होम पेज खुलने के बाद होम पेज पर आपको “आवेदन की स्थिति” के ऑप्शन दिखाई देगा जैसा की स्क्रीनशॉट मे दिखाया गया है –
  • इसके बाद आपको आवेदन की स्थिति के लिंक पर क्लिक करे।
  • उस पर क्लिक करने के बाद आपके स्क्रीन पर एक स्टेटस ट्रैकिंग फॉर्म खुल जाएगा ।
  • अब आपको अपना एप्लीकेशन नंबर दर्ज करके सर्च बटन पर क्लिक करना होगा जानकारी मिल जाएगी।
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हैसियत प्रमाणपत्र Solvency Certificate का सत्यापन कैसे करें?

यदि आप ई-डिस्ट्रक्ट यूपी पोर्टल के अंतर्गत अपने हैसियत प्रमाणपत्रों के सत्यापन करना चाहते है तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करना होगा –

  • ई-डिस्ट्रक्ट यूपी पर हैसियत प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  • ई-डिस्ट्रक्ट यूपी होमपेज पर “प्रमाणपत्र का सत्यापन ” का बिकल्प दिखाई देगा, इस पर आपको क्लिक करे ।
  • अपने हैसियत प्रमाणपत्र का क्रमांक संख्या दर्ज कर अपने प्रमाणपत्र का सत्यापन कर सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

अंत में, Solvency Certificate केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह आपकी वित्तीय ईमानदारी और मजबूती का प्रमाण है। चाहे आप बिजनेस बढ़ाना चाहते हों या सरकारी प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहते हों, यह दस्तावेज आपके लिए तरक्की के द्वार खोलता है। ऊपर बताई गई ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रिया को अपनाकर आप आसानी से अपना हैसियत प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें कि Solvency Certificate के लिए समय रहते आवेदन करना समझदारी है ताकि टेंडर की अंतिम तारीख से पहले आपके पास सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रहें। सही जानकारी और सही प्रक्रिया ही आपको अनावश्यक भागदौड़ से बचा सकती है।

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