Big Relief of Private sector employees Rule से निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत! 21 नवंबर से प्रभावी नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) के तहत, 300 से अधिक कर्मचारियों वाली बड़ी Companies को छँटनी (Layoff) करने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति (Prior Approval) लेनी होगी। आइये जानते है कि औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के मुख्य प्रावधान और कर्मचारियों के अधिकारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
1. Big Relief of Private sector employees
पिछले कुछ समय से, निजी क्षेत्र (Private Sector) में छँटनी (Layoffs) की खबरों ने कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया था। Private sector employee परेशान थेलेकिन, भारत सरकार (Indian Government) एक ऐसा कानूनी ढाँचा (Framework) लेकर आई है, जो निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा का एक मज़बूत आवरण प्रदान करता है।
Private Sector Layoffs के संबंध में यह नया नियम एक गेम चेंजर (Game Changer) साबित हो सकता है। सरकार की अनुमति के बिना अब कंपनियाँ मनमाने ढंग से छँटनी (Retrench) नहीं कर पाएंगी।
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2. नया नियम: सरकारी मंज़ूरी की अनिवार्य आवश्यकता
Labour Laws में संशोधन के बाद, विशेष रूप से औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020) के तहत, बड़े प्रतिष्ठानों (Establishments) के लिए छँटनी और बंद करने (Closure) के नियमों में महत्त्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
Private Sector Layoffs का new labore code नियम बीते 21 नवंबर से पूरे देश में प्रभावी हो चुका है।
- पुराने कानून (Old Law) में 100 श्रमिकों की सीमा थी, जिसे नए कोड (New Code) में बढ़ाकर 300 श्रमिक या उससे अधिक कर दिया गया है।
- कंपनी को कर्मचारियों का छँटनी करने से पहले समुचित सरकार (Appropriate Government) से मंज़ूरी (Approval) लेना अनिवार्य (Mandatory) होगा।
- यह नियम बड़े उद्यमों को जवाबदेह (Accountable) बनाता है और बड़े पैमाने पर छँटनी (Mass Layoffs) को नियंत्रित (Control) करने में मदद करता है।
3. मंज़ूरी की प्रक्रिया और कर्मचारियों पर प्रभाव
अगर किसी कंपनी को छँटनी करनी है, तो उसे सरकार को वैध कारण (Valid Reason) बताते हुए आवेदन (Application) देना होगा और कर्मचारियों को सूचना (Notice) देनी होगी। सरकारी प्राधिकरण (Government Authority) पूरी जाँच के बाद ही कर्मचारी को निकालने की अनुमति देगा।
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यह प्रावधान कर्मचारियों के लिए कई लाभ (Benefits) प्रदान करता है:
- कम्पनियां मनमानी करके अचानक छँटनी नहीं कर सकती है।
- छँटनी किए गए कर्मचारियों को वैधानिक मुआवज़ा (Statutory Compensation) मिलेगा।
- Employees Unions को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।
4. Worker Reskilling Fund का प्रावधान
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 का एक और महत्त्वपूर्ण प्रावधान श्रमिक पुनर्कौशल कोष (Worker Reskilling Fund) है।
* छँटनी होने पर नियोक्ता (Employer) को 15 दिनों के अंतिम आहरित वेतन (Last Drawn Wages) के बराबर राशि इस कोष में जमा करनी होगी।
* इस कोष का उपयोग छँटनी किए गए श्रमिक को नए कौशल (New Skills) सिखाने और उन्हें दूसरी नौकरी के लिए तैयार करने में किया जाएगा। यह एक सक्रिय कदम (Proactive Step) है जो कर्मचारियों को आर्थिक झटके (Economic Shock) से उबरने में मदद करता है।
5. व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business)
उद्योग जगत (Industry Bodies) ने इस नियम पर कुछ चिंताएँ (Concerns) उठाई हैं, खासकर व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business) के दृष्टिकोण से:
* लाल फीताशाही (Red Tapism) का डर: कंपनियों को डर है कि सरकारी मंज़ूरी की प्रक्रिया, समय लेने वाली (Time Consuming) हो सकती है।
* सरकार का पक्ष: सरकार ने इस डर को कम करने के लिए कानूनों को सरल बनाया (Simplification) है, जहाँ 84 रजिस्टरों की जगह मात्र 8 रजिस्टर लागू किए गए हैं। यह दर्शाता है कि सरकार ने श्रमिक कल्याण और व्यावसायिक सुगमता (Business Ease) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
6. निष्पक्ष रोज़गार प्रथाओं की ओर एक कदम
सरकार द्वारा Private Sector Layoffs के लिए अनुमति (Permission) को अनिवार्य (Mandatory) बनाना भारतीय श्रम बाजार (Indian Labour Market) में एक बड़ा नीतिगत बदलाव (Major Policy Shift) है। 21 नवंबर से लागू हुई यह संहिता कर्मचारी सशक्तीकरण (Employee Empowerment) की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जो बड़े नियोक्ताओं (Employers) को अधिक ज़िम्मेदार (More Responsible) बनाता है।
