UP Driving License New Rules 2025: ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों में बड़ा बदलाव, छोटी सी गलती और ‘फेल’उत्तर प्रदेश में यातायात व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने और सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने Driving License (DL) बनवाने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। लखनऊ के कानपुर रोड स्थित मौंदा में खुले नए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (ADTTC) ने अब मानवीय हस्तक्षेप को खत्म कर दिया है।
लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों से शुरू हुई यह पहल अब पूरे राज्य में एक मानक बनने जा रही है। Automated Driving test के बदलावों का मुख्य उद्देश्य न केवल भ्रष्टाचार को कम करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सड़क पर उतरने वाला हर चालक पूरी तरह से प्रशिक्षित और कुशल हो।
अक्सर देखा जाता था कि लोग बिना सही ट्रेनिंग के भी बिचौलियों के माध्यम से लाइसेंस बनवा लेते थे, लेकिन अब यहाँ केवल वही पास होगा जिसका प्रदर्शन 100% सटीक होगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि ये नए नियम क्या हैं और आपको लाइसेंस पाने के लिए किन चुनौतियों को पार करना होगा।
1. Automated driving test: अब कैमरा और सेंसर करेंगे फैसला
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पुराने समय में आरटीओ का कर्मचारी एक फाइल लेकर खड़ा रहता था और आपकी ड्राइविंग देखता था। लेकिन अब लखनऊ समेत यूपी के बड़े शहरों में सेंसर-बेस्ड ऑटोमेटेड ट्रैक तैयार किए गए हैं।
* सेंसर्स और सीसीटीवी: पूरे ट्रैक पर हाई-टेक सेंसर्स लगे हैं। अगर आपकी गाड़ी का टायर ट्रैक की लाइन को जरा भी छूता है, तो कंट्रोल रूम में तुरंत रेड सिग्नल जल जाता है।
* डिजिटल स्कोरिंग: आपकी योग्यता का निर्धारण कोई इंसान नहीं, बल्कि एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
2. UP Driving License में ‘8-शेप’ और ‘H-ट्रैक’ की अग्निपरीक्षा
ड्राइविंग टेस्ट को अब लेवल-आधारित चुनौती बना दिया गया है।
- ‘8’ का आकार: बाइक और कार दोनों के लिए ‘8’ के आकार वाले ट्रैक पर गाड़ी घुमाना अनिवार्य है। इसमें आपकी टर्निंग रेडियस और संतुलन की जांच होती है।
- रिवर्स और पैरेलल पार्किंग: सबसे ज्यादा लोग पार्किंग टेस्ट में फेल हो रहे हैं। आपको बिना किसी बाधा को छुए गाड़ी को पीछे की ओर से एक निश्चित बॉक्स में पार्क करना होता है।
- ढलान टेस्ट (Gradient Test): गाड़ी को ढलान पर रोककर फिर से आगे बढ़ाना होता है, इस दौरान गाड़ी पीछे नहीं खिसकनी चाहिए।
3. Driving License test में समय की पाबंदी: हर सेकेंड की कीमत
Automated Driving test आर्टिकल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा समय सीमा है। विभाग ने हर टेस्ट के लिए समय निर्धारित किया है:
* 2-व्हीलर/4-व्हीलर: पूरा ट्रैक पार करने के लिए 3 मिनट 15 सेकेंड का समय मिलता है।
* भारी वाहन (Truck/Bus): पैरेलल पार्किंग के लिए 60 सेकेंड और रिवर्स के लिए 75 सेकेंड।
* इश्यू: यदि आप ट्रैक तो सही पार कर लेते हैं लेकिन समय सीमा (Time Limit) से बाहर हो जाते हैं, तो आपको ‘Fail’ करार दिया जाएगा।
4. Simulator testing: वर्चुअल वर्ल्ड से असली सड़क तक
असली ट्रैक पर जाने से पहले, आवेदकों को एक ड्राइविंग सिमुलेटर (Driving Simulator) टेस्ट से गुजरना पड़ता है। यह एक वर्चुअल मशीन है जो आपको सड़क पर गाड़ी चलाने का वास्तविक अनुभव देती है। यहाँ आपसे निम्नलिखित स्थितियों का सामना कराया जाता है:
- अचानक से किसी बच्चे का सड़क पर आ जाना।
- रात के समय और तेज बारिश में विजिबिलिटी कम होना।
- ट्रैफिक सिग्नल्स का पालन करना।
5. क्यों बढ़ रहा है ‘फेल’ होने का प्रतिशत? (Key Issues)
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हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मौंदा सेंटर पर टेस्ट देने वाले करीब 40% से 60% लोग फेल होकर खाली हाथ लौट रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
* अभ्यास की कमी: लोग सीधे टेस्ट देने पहुँच जाते हैं, जबकि ट्रैक के मोड़ बहुत घुमावदार होते हैं।
* टेक्नोलॉजी का डर: पहली बार सेंसर्स के बीच गाड़ी चलाने पर लोग नर्वस हो जाते हैं।
* नियमों की अनदेखी: सीट बेल्ट न लगाना या इंडिकेटर का गलत इस्तेमाल करना भी फेल होने का बड़ा कारण है।
6. Driving License के लिए आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)
यदि आप यूपी में लाइसेंस बनवाना चाहते हैं, तो इस प्रक्रिया का पालन करें:
* सारथी पोर्टल (Parivahan Sathi): सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन करें और फीस जमा करें। * लर्नर लाइसेंस (LL): सबसे पहले आपको एक ऑनलाइन कंप्यूटर टेस्ट पास करना होगा, जिसके बाद आपको
7. महीने के लिए लर्नर लाइसेंस मिलेगा।
* स्लॉट बुकिंग: लर्नर लाइसेंस के 1 महीने बाद आप परमानेंट डीएल (Permanent DL) के लिए टेस्ट का स्लॉट बुक कर सकते हैं।
* डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: आरटीओ ऑफिस में बायोमेट्रिक्स और फोटो के बाद आपको टेस्ट ट्रैक पर भेजा जाएगा।
8. एक्सपर्ट टिप्स: पहली बार में टेस्ट कैसे पास करें?
* YouTube की मदद लें: ‘8-Shape’ और ‘H-Track’ के वीडियो देखें ताकि आपको ट्रैक के लेआउट का अंदाजा हो जाए।
* अपना वाहन इस्तेमाल करें: यदि संभव हो, तो अपनी वही गाड़ी ले जाएं जिस पर आपका हाथ साफ है, क्योंकि नई या अपरिचित गाड़ी से क्लच और ब्रेक कंट्रोल में दिक्कत हो सकती है।
* संकेतों पर ध्यान दें: ट्रैक पर लगे ट्रैफिक बोर्ड्स को अनदेखा न करें।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार का यह Driving License New Rules सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। भले ही आज लाइसेंस बनवाना कठिन लग रहा हो, लेकिन इससे भविष्य में अनट्रेंड ड्राइवरों की संख्या कम होगी और जान-माल का नुकसान कम होगा। अब उत्तर प्रदेश में Driving License केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि आपकी असली योग्यता का प्रमाण होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – आपकी शंकाओं का समाधान
प्रश्न-1. क्या अब बिना टेस्ट दिए उत्तर प्रदेश में Driving License बन सकता है?
उत्तर: नहीं, अब उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में बिना ऑटोमेटेड ट्रैक टेस्ट पास किए परमानेंट लाइसेंस (Permanent DL) नहीं बन सकता। सभी प्रक्रिया अब पारदर्शी और सेंसर-आधारित है।
प्रश्न-2. अगर मैं ऑटोमेटेड ट्रैक टेस्ट में फेल हो जाऊं, तो क्या होगा?
उत्तर: यदि आप टेस्ट में फेल हो जाते हैं, तो आपको तुरंत लाइसेंस नहीं मिलेगा। आपको दोबारा ‘स्लॉट बुक’ करना होगा और फिर से टेस्ट फीस जमा करके दोबारा परीक्षा देनी होगी। आमतौर पर दोबारा टेस्ट के लिए 7 दिनों का समय दिया जाता है।
प्रश्न-3. लखनऊ में नया ड्राइविंग टेस्ट सेंटर कहाँ स्थित है?
उत्तर: लखनऊ में नया हाई-टेक Automated Driving Training and Testing Center(ADTTC) कानपुर रोड पर स्थित मौंदा (Udet Khera) में बनाया गया है।
प्रश्न-4. क्या मुझे टेस्ट के लिए अपनी खुद की गाड़ी ले जानी होगी?
उत्तर: हाँ, आमतौर पर आवेदकों को अपनी गाड़ी (जिस श्रेणी का लाइसेंस चाहिए, जैसे- LMV या 2-Wheeler) ले जानी होती है। हालांकि, कुछ केंद्रों पर भुगतान के आधार पर वाहन उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन अपनी गाड़ी पर अभ्यास बेहतर रहता है।
प्रश्न-5. ड्राइविंग टेस्ट पास करने के लिए न्यूनतम स्कोर क्या है?
उत्तर: ऑटोमेटेड ट्रैक पर आपको 90% से 100% सटीकता दिखानी होती है। यदि आप ट्रैक की सीमा को दो बार से ज्यादा छूते हैं या समय सीमा (Time Limit) से बाहर जाते हैं, तो कंप्यूटर आपको खुद-ब-खुद फेल कर देता है।
