भारतीय झंडा हमारे देश की आन बान शान है दुनिया तिरेंगे को सलाम करती है कभी कभी इस तिरेंगे के फहराने के समय और साइज़ में बदलाव भी किया जाता है। अभी एक Indian Flag Standard Changes किया गया है जिसे आप सभी को जान लेना जरुरी है। जानिये भारतीय ध्वज के बारे में।
1. परिचय: भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के नए दौर की शुरुआत
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ केवल तीन रंगों का संगम नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के स्वाभिमान, गौरव, बलिदान और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है। स्वतंत्रता के बाद से ही तिरंगे की गरिमा, बुनावट, अनुपात और रंगों की सटीकता को बनाए रखने के लिए सख्त कानूनी व तकनीकी मानक निर्धारित किए गए हैं। हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards – BIS) ने राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण और मानकों में ऐतिहासिक बदलाव करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस कदम से संबंधित अपडेट्स को Indian Flag Standard Changes के रूप में जाना जा रहा है।
यह महत्वपूर्ण कदम वैश्विक मंचों, बड़े सार्वजनिक स्थलों, अंतरराष्ट्रीय एक्सपो (International Expos) और राष्ट्रीय स्मारकों पर और अधिक भव्य रूप में तिरंगा लहराने के उद्देश्य से उठाया गया है। Indian Flag Standard Changes का मुख्य उद्देश्य भारतीय ध्वज की मूल संरचना और भावना को बनाए रखते हुए आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप उसके आकार, रंग-मापन तकनीकों (Colour Measurement Methods) और सामग्री के मानकों को अपडेट करना है।

2. BIS द्वारा राष्ट्रीय ध्वज मानकों में संशोधन (Revisions by BIS)
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) राष्ट्रीय ध्वज की गुणवत्ता और विनिर्देशों का निर्धारण करने वाली भारत की सर्वोच्च संस्था है। BIS द्वारा लाए जा रहे Indian Flag Standard Changes के तहत भारतीय मानक कोड IS 1:1968 में बड़ा संशोधन किया जा रहा है। यह मूल मानक मुख्य रूप से हाथ से कते और बुने गए सूती खादी (Cotton Khadi Bunting) से बने तिरंगे के विनिर्देशों से संबंधित है।
इसके साथ ही, BIS दो अन्य संबंधित मानकों में भी व्यापक बदलाव कर रहा है:
* IS 300:1968: रेशम खादी (Silk Khadi Bunting) से बने राष्ट्रीय ध्वजों के निर्माण मानक।
* IS 400:1968: ऊनी खादी (Wool Khadi Bunting) से बने राष्ट्रीय ध्वजों के निर्माण मानक।
Indian Flag Standard Changes के अंतर्गत इन तीनों मानकों की एक साथ समीक्षा की जा रही है ताकि आधुनिक विनिर्माण प्रणालियों और नए अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के अनुरूप झंडों का निर्माण किया जा सके।
3. राष्ट्रीय ध्वज मानकों का ऐतिहासिक इतिहास (History of Flag Standards)
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के तकनीकी मानकों के विकास का एक समृद्ध इतिहास रहा है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा तिरंगे के प्रारूप को अपनाया गया था। इसके बाद, भारतीय मानक संस्था (ISI – जिसे अब BIS कहा जाता है) ने ध्वज के निर्माण के लिए पहला मानक जारी किया। Indian Flag Standard Changes के इतिहास में तीन प्रमुख पड़ाव रहे हैं:
* 1951 (प्रथम मानक – IS 1:1951): स्वतंत्रता के बाद पहली बार तिरंगे के निर्माण, कपड़े की गुणवत्ता और नौ निश्चित आकारों के लिए आधिकारिक मानक अधिसूचित किया गया था।
* 1964 (द्वितीय संशोधन – IS 1:1964): भारत सरकार द्वारा मीट्रिक प्रणाली (Metric System) अपनाने के बाद झंडे के सभी मापों को इंच से बदलकर मिलीमीटर (mm) में परिवर्तित किया गया।
* 1968 (तृतीय संशोधन – IS 1:1968): इस संशोधन में झंडे के विभिन्न पैनलों (पट्टी) को जोड़ने की सिलाई प्रणाली, अशोक चक्र की सहनशीलता (tolerance limits) और रस्सियों व गुल्लियों (toggles) के मानकों को और अधिक परिष्कृत किया गया।
वर्ष 1968 के बाद, अब 2026 में पहली बार Indian Flag Standard Changes के जरिए चौथा बड़ा संशोधन लागू किया जा रहा है।
मुख्य आकर्षण: नए Indian Flag Standard Changes की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अब 9 मीटर लंबाई और 6 मीटर चौड़ाई (9000 mm × 6000 mm) वाले बेहद बड़े आकार के तिरंगे झंडे के निर्माण और प्रदर्शन का स्पष्ट कानूनी प्रावधान शामिल किया जा रहा है। इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, ग्लोबल सम्मेलनों और देश-विदेश के बड़े स्मारकों पर किया जाएगा।
4. इस्तेमाल के आधार पर तिरंगे के सभी मानक आकार (Flag Sizes & Specifications)
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात हमेशा 3:2 (Length to Width Ratio) होता है। Indian Flag Standard Changes से पहले कुल 9 मानक आकार निर्धारित थे। अब नए नियम के तहत बड़े झंडों के प्रावधान जोड़े गए हैं। नीचे दी गई तालिका में उपयोग के आधार पर तिरंगे के आकारों का पूरा विवरण प्रस्तुत है:
| क्रमांक | ध्वज का आकार (मिमी / mm) | उपयोग / प्रदर्शन का स्थान (Intended Display Use) |
| 1 | 150 × 100 mm | डेस्क, मेज प्रदर्शन एवं छोटे टेबल स्टैंड के लिए। |
| 2 | 225 × 150 mm | VVIPs, मंत्रियों और विशिष्ट अधिकारियों की गाड़ियों के लिए । |
| 3 | 450 × 300 mm | VVIP उड़ानों और विशेष विमानों पर लगाने के लिए। |
| 4 | 900 × 600 mm | सामान्य घरेलू उपयोग या छोटे निजी/सरकारी कार्यालयों के लिए । |
| 5 | 1800 × 1200 mm | मध्यम आकार के सरकारी कार्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों के लिए। |
| 6 | 2700 × 1800 mm | चौराहों के ऊंचे पोल (High-mast poles) पर फहराने के लिए । |
| 7 | 3600 × 2400 mm | बड़े सरकारी भवनों, राजभवनों और सचिवालय परिसरों के लिए । |
| 8 | 6300 × 4200 mm | बड़े सार्वजनिक स्मारकों, राष्ट्रीय धरोहरों व इमारतों के लिए । |
| 9(नया) | 9000 × 6000 mm | अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, एक्सपो और विशाल सार्वजनिक परिसरों के लिए । |
यह देखा जा सकता है कि Indian Flag Standard Changes के माध्यम से सार्वजनिक प्रदर्शन की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आकारों में आधुनिकता लाई गई है।
5. रंगों की मापन प्रणाली में बदलाव (Updated Colour Measurement Norms)
राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों – इंडिया केसरी (India Saffron), सफेद (White), और इंडिया ग्रीन (India Green) की शुद्धता और चमक तिरंगे की पहचान का मूल आधार हैं। Indian Flag Standard Changes के तहत रंगों के मापन के पुराने तौर-तरीकों की गहन समीक्षा की जा रही है।
ध्वज मानकों में रंगों को मापने के लिए निम्नलिखित दो मुख्य पैमानों को अपडेट किया जा रहा है:
* ट्राइक्रोमैटिक कोऑर्डिनेट्स (Trichromatic Coordinates): यह रंग के सटीक शेड और वेवलेंथ को वैज्ञानिक रूप से मापने का एक अंतरराष्ट्रीय तरीका है। इसके अपडेट होने से सभी झंडों में केसरिया और हरा रंग बिल्कुल एक समान दिखेगा।
* ब्राइटनेस प्रतिशत (Brightness Percentage): कपड़े पर रंग की चमक और परावर्तन दर कितनी होनी चाहिए, इसके आधुनिक मानक तय किए जा रहे हैं ताकि विभिन्न रोशनी में भी ध्वज स्पष्ट दिखे।
यह वैज्ञानिक सुधार Indian Flag Standard Changes का एक बेहद अहम हिस्सा है जो डिजिटल और फिजिकल दोनों प्रस्तुतियों में रंग स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
6. प्रमाणन (Certification) और खादी बुनावट नियम
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज निर्माण के लिए मानक प्रमाणन (Certification) फिलहाल स्वैच्छिक (Voluntary) है। वर्तमान में BIS द्वारा प्रमाणित निर्माताओं को अब तक 6 आधिकारिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।
Indian Flag Standard Changes में ध्वज निर्माण की मूल भावना से कोई समझौता नहीं किया गया है:
* हाथ से कते एवं बुने कपड़े का मानक IS 1:1968 के तहत मुख्य ध्वज केवल हाथ से कते और हाथ से बुने गए सूती खादी (Hand-spun and hand-woven cotton khadi bunting) से ही निर्मित होना चाहिए।
* अशोक चक्र का मानक: ध्वज के मध्य की सफेद पट्टी पर नौसेना नीले (Navy Blue) रंग का अशोक चक्र होना अनिवार्य है, जिसमें 24 तिल्लियां (24 spokes) होती हैं। चक्र ध्वज के दोनों ओर समान रूप से स्पष्ट दिखाई देना चाहिए।
* ध्वज संहिता का पालन: यद्यपि आकार और रंगों के मापन में Indian Flag Standard Changes लागू हो रहे हैं, परंतु भारतीय ध्वज संहिता 2002 (Flag Code of India 2002) के तहत ध्वज के सम्मान, फहराने की विधियों और रखरखाव के नियम यथावत लागू रहेंगे।
7. निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहा जाए तो भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा लागू किए जा रहे Indian Flag Standard Changes देश की बदलती अंतरराष्ट्रीय छवि और आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। 9000 mm × 6000 mm के नए विशालकाय आकार को शामिल करने से लेकर रंगों की सटीक वैज्ञानिक मापन प्रणाली तक, यह संशोधन तिरंगे की आन, बान और शान को और अधिक भव्यता प्रदान करेगा।
हर भारतीय नागरिक और निर्माता के लिए Indian Flag Standard Changes की जानकारी होना आवश्यक है ताकि हमारे राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण और प्रदर्शन हमेशा सर्वोच्च गुणवत्ता और गरिमा के साथ होता रहे।
