अपने अपना पुराना वाहन बेच दिया है resale vehicle transfer (RC Transfer) करना है। खरीददार vehicle transfer नहीं करा रहा है और आप परेशान है। अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है । यहाँ जाने आरटीओ नियम क्या कहता है? यहं जाने resale vehicle transfer कैसे करे ,जोखिम और कानूनी जटिलताओं से कैसे बचें।
क्यों ज़रूरी है Resale Vehicle Transfer ?
भारत में जब भी आप कोई पुराना वाहन (गाड़ी या मोटरसाइकिल) खरीदते या बेचते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है उसका resale vehicle transfer (वाहन के स्वामित्व का हस्तांतरण), जिसे आमतौर पर आरसी (Registration Certificate) ट्रांसफर कहा जाता है। यह सिर्फ एक कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक कानूनी अनिवार्यता है जो विक्रेता और खरीदार दोनों को भविष्य की संभावित परेशानियों से बचाती है।
अक्सर लोग आपसी विश्वास पर वाहन का सौदा कर लेते हैं और नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ कर देते हैं या इसे टाल देते हैं। कि वाहन को बेच देने के बाद भी, जब तक आरसी पर नाम नहीं बदलता, तब तक कानूनी रूप से मालिक आप ही रहते हैं।
कानून की नज़र में, वाहन का ‘मालिक’ वह व्यक्ति है जिसका नाम पंजीकरण प्रमाण पत्र (RC) में दर्ज है। अगर बेचा गया वाहन किसी दुर्घटना, अपराध या ट्रैफिक चालान में शामिल होता है, तो सबसे पहले कानूनी जिम्मेदारी मौजूदा रजिस्टर्ड मालिक (यानी, विक्रेता) पर ही आती है। इसलिए, अपनी कानूनी और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, resale vehicle transfer की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करना बहुत ज़रूरी है।
पुराना वाहन बेचते समय बरतें ये सावधानियां (विक्रेता के लिए)
पुराना वाहन बेचते समय विक्रेता को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि वाहन के स्वामित्व का रिकॉर्ड बदलने तक कानूनी रूप से वही जिम्मेदार रहता है। अखबार की कटिंग और कानूनी जानकारी के आधार पर निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:
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1. RC Transfer के आवश्यक दस्तावेज़ और प्रक्रियाएं:
* विक्रेता को तत्काल प्रभाव से RTO (Regional Transport Office) को वाहन की बिक्री की सूचना देनी चाहिए। इसके लिए फॉर्म 29 की दो प्रतियां भरकर खरीदार से दस्तखत कराएं। यह फॉर्म बिक्री के 14 दिनों के भीतर आरटीओ में जमा करना अनिवार्य है।
* खरीदार को आरटीओ में स्वामित्व हस्तांतरण के लिए फॉर्म 30 को अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा करना होता है। विक्रेता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खरीदार ने यह फॉर्म सही समय पर जमा किया है।
* खरीदार को मूल आरसी, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) और अन्य फॉर्म सौंपने से पहले उनकी एक-एक फोटोकॉपी अपने पास ‘प्राप्त किया’ की मुहर के साथ रखें।
* खरीदार को वाहन सौंपते समय एक हस्ताक्षरित डिलीवरी नोट/बिक्री समझौता ज़रूर बनवाएं, जिसमें बिक्री की तारीख, समय और खरीदार के विवरण का स्पष्ट उल्लेख हो।
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* यदि वाहन पर कोई लोन (हाइपोथिकेशन) था, तो उसे बैंक/फाइनेंसर से पूरी तरह मुक्त कराएं और आरसी से हाइपोथिकेशन एंडोर्समेंट (Form 35) हटवा लें।
2. समय सीमा और अनुपालन:
* विक्रेता को बिक्री के 14 दिनों के भीतर आरटीओ में बिक्री की सूचना (फॉर्म 29) जमा करनी चाहिए।
* खरीदार को बिक्री के 30 दिनों के भीतर आरटीओ में स्वामित्व हस्तांतरण के लिए आवेदन (फॉर्म 30) जमा करना होता है। विक्रेता को इस पर लगातार नज़र रखनी चाहिए।
* कुछ विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि अगर खरीदार ट्रांसफर में देरी कर रहा है, तो विक्रेता को स्थानीय पुलिस स्टेशन में बिक्री की एक औपचारिक सूचना देनी चाहिए ,शिकायत नहीं ।
कानूनी/वित्तीय गड़बड़ी और परिणाम (विक्रेता के लिए सबसे बड़ी चिंता)
पुराने वाहन को बेचने के बाद नाम ट्रांसफर न होने पर विक्रेता को गंभीर कानूनी और वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
1. दुर्घटना या आपराधिक मामले में फंसना:
* सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के अनुसार, जब तक आरसी में नाम ट्रांसफर नहीं होता, तब तक दुर्घटना की स्थिति में रजिस्टर्ड मालिक (विक्रेता) ही तीसरे पक्ष के प्रति जवाबदेह होता है।
* यदि वाहन का उपयोग किसी अपराध या गैरकानूनी गतिविधि में होता है, तो पुलिस सबसे पहले रजिस्टर्ड मालिक को ही ट्रैक करेगी। आपको अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।
* यदि दुर्घटना होती है, तो खरीदार बीमा क्लेम प्राप्त करने में कानूनी जटिलताओं का सामना कर सकता है, क्योंकि पॉलिसी रजिस्टर्ड मालिक के नाम पर होगी।
2. ट्रैफिक चालान और देनदारी:
* वाहन से जुड़े सभी ट्रैफिक चालान (जैसे ओवर-स्पीडिंग, नो-पार्किंग, प्रदूषण उल्लंघन) रजिस्टर्ड मालिक के नाम पर आते रहेंगे। जब तक आप साबित नहीं कर देते कि वाहन बेचा जा चुका है, तब तक आपको इन चालानों का भुगतान करना पड़ सकता है।
* वाहन से संबंधित किसी भी लंबित रोड टैक्स, जुर्माना या अन्य सरकारी शुल्क की जिम्मेदारी भी रजिस्टर्ड मालिक पर बनी रहती है।
3. आरटीओ द्वारा कार्रवाई:
* यदि खरीदार 30 दिनों के भीतर ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो आरटीओ वाहन के पंजीकरण को रद्द कर सकता है या जुर्माना लगा सकता है।
Process of Resale Vehicle Transfer – RTO में नाम ट्रांसफर)
वाहन के स्वामित्व का हस्तांतरण एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है, जिसे खरीदार और विक्रेता दोनों को मिलकर पूरा करना होता है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन (परिवहन पोर्टल के माध्यम से) या ऑफलाइन (स्थानीय आरटीओ में) की जा सकती है।
1. आवश्यक दस्तावेज़ (Intra-state Transfer):
| विक्रेता द्वारा आवश्यक दस्तावेज़ | खरीदार द्वारा आवश्यक दस्तावेज़ |
| फॉर्म 29 की 2 प्रतियां (बिक्री की सूचना) | फॉर्म 30 (स्वामित्व हस्तांतरण आवेदन) |
| फॉर्म 28 (NOC – यदि राज्य के भीतर ही ट्रांसफर हो) | पहचान प्रमाण (आधार, पैन कार्ड, पासपोर्ट) |
| मूल आरसी (Registration Certificate) | पते का प्रमाण |
| वैध बीमा पॉलिसी की प्रति | पैन कार्ड या फॉर्म 60/61 |
| पीयूसी (PUC) प्रमाण पत्र की प्रति | पासपोर्ट साइज़ फोटो |
| पैन कार्ड की प्रति या फॉर्म 60/61 | चेसिस और इंजन नंबर का पेंसिल प्रिंट |
नोट: यदि वाहन पर लोन था, तो बैंक से मिला फॉर्म 35 और एनओसी (NOC) भी आवश्यक है।
2. स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया (Resale Vehicle Transfer):
* विक्रेता और खरीदार सभी आवश्यक फॉर्म (29 और 30) और दस्तावेज़ (आरसी, बीमा, पीयूसी, आईडी प्रूफ) एकत्रित करें और सही ढंग से भरें।
* खरीदार, बिक्री की तारीख से 30 दिनों के भीतर, विक्रेता द्वारा हस्ताक्षरित फॉर्म और अन्य दस्तावेज़ों के साथ अपने स्थानीय आरटीओ में आवेदन जमा करता है।
* स्वामित्व हस्तांतरण शुल्क का भुगतान आरटीओ में या ऑनलाइन करें। यह शुल्क वाहन के प्रकार पर निर्भर करता है।
* आरटीओ अधिकारी दस्तावेज़ों की जांच करते हैं और, यदि आवश्यक हो, तो वाहन का भौतिक निरीक्षण (Physical Verification) किया जाता है।
* सफल सत्यापन के बाद, आरटीओ एक नई आरसी जारी करता है, जिसमें खरीदार का नाम मालिक के रूप में दर्ज होता है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर कुछ सप्ताह लग सकते हैं।
3. RC Transfer के बाद:
* नए मालिक को तुरंत बीमा कंपनी से संपर्क करके पॉलिसी को अपने नाम पर ट्रांसफर करवाना चाहिए। बिना बीमा ट्रांसफर के दुर्घटना होने पर क्लेम खारिज हो सकता है।
* नया आरसी मिलने तक विक्रेता को फॉर्म 29 और 30 की आरटीओ मुहर लगी हुई प्रतियां और बिक्री समझौते को सुरक्षित रखना चाहिए।
RTO में Resale Vehicle Transfer होने के बाद ही पूरी होती है
बिक्री’ सिर्फ पैसे के लेन-देन से पूरी नहीं होती, बल्कि कानूनी रूप से ‘स्वामित्व का हस्तांतरण’ आवश्यक है।
* मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत, जब तक वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) खरीदार के नाम पर अपडेट नहीं हो जाता, तब तक कानूनी रूप से विक्रेता ही मालिक बना रहता है।
* एक बार आरसी में नाम ट्रांसफर हो जाने पर, विक्रेता कानूनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त हो जाता है। इसके बाद होने वाली किसी भी घटना के लिए नया मालिक ही जवाबदेह होता है।
अतः, प्रत्येक विक्रेता को चाहिए कि वह खरीदार पर resale vehicle transfer प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव बनाए और खुद भी आरटीओ में बिक्री की सूचना (फॉर्म 29) समय पर जमा करे। इस प्रक्रिया में देरी या लापरवाही भविष्य में गंभीर और अप्रत्याशित कानूनी समस्याओं का कारण बन सकती है।
निष्कर्ष
पुराना वाहन बेचना एक सरल प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन resale vehicle transfer के मामले में की गई थोड़ी सी भी लापरवाही विक्रेता के लिए एक बड़ा कानूनी सिरदर्द बन सकती है। RC Transfer केवल एक औपचारिक कदम नहीं है, बल्कि कानूनी और वित्तीय देनदारी से मुक्ति पाने का एकमात्र तरीका है।
खरीदार के लिए यह ज़रूरी है कि वह समय पर अपने नाम पर RC Transfer करवाए ताकि वह वाहन का वैध मालिक बन सके और बीमा जैसे लाभ प्राप्त कर सके। विक्रेता और खरीदार दोनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे सभी आरटीओ नियमों और समय सीमाओं का पालन करें, खासकर फॉर्म 29 और 30 को जमा करने के संबंध में।
