संकट हरन, बिघ्न टारन भगवान भोलेनाथ ,शिव के 108 नाम

Hemraj Maurya

सनातन परंपरा में भगवान शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि करुणा, कृपा और मुक्ति के परम स्रोत हैं। वे ‘आशुतोष’ हैं, जो मात्र एक लोटा जल और सच्चे हृदय के भाव से प्रसन्न हो जाते हैं। जब-जब सृष्टि पर या उनके भक्त पर कोई संकट या विघ्न आता है, भोलेनाथ ‘ संकट हरन ‘ और ‘विघ्नांतक’ बनकर ढाल की तरह खड़े हो जाते हैं।

समुद्र मंथन के समय जब संपूर्ण ब्रह्मांड कालकूट विष की अग्नि में जल रहा था, तब समस्त देवताओं और जीवों की रक्षा के लिए प्रभु शिव ने सहर्ष उस हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और ‘नीलकंठ’ कहलाए। वे स्वयं विष पीकर अपने बच्चों को अमृत प्रदान करते हैं—यही उनकी अनंत कृपालुता का प्रमाण है।

संकट हरन, बिघ्न टारन भगवान भोलेनाथ ,शिव के 108 नाम

 

संकट हरन, बिघ्न टारन  भगवान भोलेनाथ ,शिव के 108 नाम

संकट हरन, बिघ्न टारन  भगवान भोलेनाथ ,शिव के 108 नाम —

१- ॐ भोलेनाथ नमः

२-ॐ कैलाश पति नमः

३-ॐ भूतनाथ नमः

४-ॐ नंदराज नमः

५-ॐ नन्दी की सवारी नमः

६-ॐ ज्योतिलिंग नमः

७-ॐ महाकाल नमः

८-ॐ रुद्रनाथ नमः

९-ॐ भीमशंकर नमः

१०-ॐ नटराज नमः

११-ॐ प्रलेयन्कार नमः

१२-ॐ चंद्रमोली नमः

१३-ॐ डमरूधारी नमः

१४-ॐ चंद्रधारी नमः

१५-ॐ मलिकार्जुन नमः

१६-ॐ भीमेश्वर नमः

१७-ॐ विषधारी नमः

१८-ॐ बम भोले नमः

१९-ॐ ओंकार स्वामी नमः

२०-ॐ ओंकारेश्वर नमः

२१-ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः

२२-ॐ विश्वनाथ नमः

२३-ॐ अनादिदेव नमः

२४-ॐ उमापति नमः

२५-ॐ गोरापति नमः

२६-ॐ गणपिता नमः

२७-ॐ भोले बाबा नमः

२८-ॐ शिवजी नमः

२९-ॐ शम्भु नमः

३०-ॐ नीलकंठ नमः

३१-ॐ महाकालेश्वर नमः

३२-ॐ त्रिपुरारी नमः

३३-ॐ त्रिलोकनाथ नमः

३४-ॐ त्रिनेत्रधारी नमः

३५-ॐ बर्फानी बाबा नमः

३६-ॐ जगतपिता नमः

३७-ॐ मृत्युन्जन नमः

३८-ॐ नागधारी नमः

३९- ॐ रामेश्वर नमः

४०-ॐ लंकेश्वर नमः

४१-ॐ अमरनाथ नमः

४२-ॐ केदारनाथ नमः

४३-ॐ मंगलेश्वर नमः

४४-ॐ अर्धनारीश्वर नमः

४५-ॐ नागार्जुन नमः

४६-ॐ जटाधारी नमः

४७-ॐ नीलेश्वर नमः

४८-ॐ गलसर्पमाला नमः

४९- ॐ दीनानाथ नमः

५०-ॐ सोमनाथ नमः

५१-ॐ जोगी नमः

५२-ॐ भंडारी बाबा नमः

५३-ॐ बमलेहरी नमः

५४-ॐ गोरीशंकर नमः

५५-ॐ शिवाकांत नमः

५६-ॐ महेश्वराए नमः

५७-ॐ महेश नमः

५८-ॐ ओलोकानाथ नमः

५४-ॐ आदिनाथ नमः

६०-ॐ देवदेवेश्वर नमः

६१-ॐ प्राणनाथ नमः

६२-ॐ शिवम् नमः

६३-ॐ महादानी नमः

६४-ॐ शिवदानी नमः

६५-ॐ संकटहारी नमः

६६-ॐ महेश्वर नमः

६७-ॐ रुंडमालाधारी नमः

६८-ॐ जगपालनकर्ता नमः

६९-ॐ पशुपति नमः

७०-ॐ संगमेश्वर नमः

७१-ॐ दक्षेश्वर नमः

७२-ॐ घ्रेनश्वर नमः

७३-ॐ मणिमहेश नमः

७४-ॐ अनादी नमः

७५-ॐ अमर नमः

७६-ॐ आशुतोष महाराज नमः

७७-ॐ विलवकेश्वर नमः

७८-ॐ अचलेश्वर नमः

७९-ॐ अभयंकर नमः

८०-ॐ पातालेश्वर नमः

८१-ॐ धूधेश्वर नमः

८२-ॐ सर्पधारी नमः

८३-ॐ त्रिलोकिनरेश नमः

८४-ॐ हठ योगी नमः

८५-ॐ विश्लेश्वर नमः

८६- ॐ नागाधिराज नमः

८७- ॐ सर्वेश्वर नमः

८८-ॐ उमाकांत नमः

८९-ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः

९०-ॐ त्रिकालदर्शी नमः

९१-ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः

९२-ॐ महादेव नमः

९३-ॐ गढ़शंकर नमः

९४-ॐ मुक्तेश्वर नमः

९५-ॐ नटेषर नमः

९६-ॐ गिरजापति नमः

९७- ॐ भद्रेश्वर नमः

९८-ॐ त्रिपुनाशक नमः

९९-ॐ निर्जेश्वर नमः

१०० -ॐ किरातेश्वर नमः

१०१-ॐ जागेश्वर नमः

१०२-ॐ अबधूतपति नमः

१०३ -ॐ भीलपति नमः

१०४-ॐ जितनाथ नमः

१०५-ॐ वृषेश्वर नमः

१०६-ॐ भूतेश्वर नमः

१०७-ॐ बैजूनाथ नमः

१०८-ॐ नागेश्वर नमःv

यह भगवान भोलेनाथ के १०८ नाम केवल जप करने मात्र  से ही सभी दुख,कष्ट, संकट दूर  हो जाते है।

भगवान शिव के 108 पावन नाम और उनके कल्याणकारी अर्थ

शिव के प्रत्येक नाम में एक विशेष शक्ति और मंत्र का वास है। इनके नाम स्मरण मात्र से जीवन की बाधाएं, भय और संकट स्वतः दूर हो जाते हैं:

क्र.सं.नामपावन अर्थ
1शिवपरम कल्याणकारी
2महेश्वरसभी देवों और ईश्वर के स्वामी
3शंभुसुख और आनंद के जन्मदाता
4पिनाकीपिनाक धनुष को धारण करने वाले
5शशिशेखरमस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले
6वामदेवअत्यंत सुंदर स्वभाव वाले देव
7विरूपाक्षविशेष (तीन) नेत्रों वाले
8कपर्दीजटाजूट धारण करने वाले
9नीललोहितनीले और लाल रंग वाले
10शंकरसबका कल्याण और मंगल करने वाले
11शूलपाणिहाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
12खटवांगीखटवांग (अस्त्र) धारण करने वाले
13विष्णुवल्लभभगवान विष्णु के परम प्रिय
14शिपिविष्टप्रकाश से आच्छादित रहने वाले
15अंबिकानाथमाता पार्वती के स्वामी
16श्रीकंठसुंदर कंठ वाले
17भक्तवत्सलभक्तों से अत्यंत प्रेम करने वाले
18भवसंसार रूप में प्रकट होने वाले
19शर्वसमस्त पापों का नाश करने वाले
20त्रिलोकेशतीनों लोकों के स्वामी
21शितिकंठसफेद/नीले कंठ वाले
22शिवाप्रियमां पार्वती के अति प्रिय
23उग्रप्रचंड रूप धारण करने वाले
24कपालीकपाल (पात्र) धारण करने वाले
25कामारीकामदेव का मर्दन करने वाले
26अंधकासुरसूदनअंधकासुर दैत्य का वध करने वाले
27गंगाधरजटाओं में पवित्र गंगा को धारण करने वाले
28ललाटाक्षमस्तक पर तीसरा नेत्र रखने वाले
29कालकालकाल (मृत्यु) के भी काल
30कृपानिधिदया और कृपा के सागर
31भीमभयंकर व विशाल रूप वाले
32परशुहस्तहाथ में फरसा धारण करने वाले
33मृगपाणिहाथ में हिरण को थामने वाले
34जटाधरघनी जटाओं को धारण करने वाले
35कैलाशवासीकैलाश पर्वत पर निवास करने वाले
36कवचीकवच धारण करने वाले
37कठोरदुष्टों के लिए अत्यंत कठोर
38त्रिपुरांतकत्रिपुरासुर का अंत करने वाले
39वृषांकध्वज पर बैल का चिन्ह रखने वाले
40वृषभारूढ़नंदी (बैल) की सवारी करने वाले
41भस्मधूलितविग्रहशरीर पर भस्म लगाने वाले
42सामप्रियसामवेद के गान से प्रसन्न होने वाले
43स्वरमयीसातों स्वरों में निवास करने वाले
44त्रयीमूर्तिवेदत्रयी रूपी मूर्ति
45अनीश्वरजिनका कोई स्वामी न हो (स्वयं सर्वोच्च)
46सर्वज्ञसब कुछ जानने वाले
47परमात्मासर्वोपरि आत्मा
48सोमसूर्याग्निलोचनसूर्य, चंद्र और अग्नि रूपी तीन नेत्र वाले
49हवियज्ञ की आहुति रूप
50यज्ञमयस्वयं यज्ञ स्वरूप
51सोमउमा के साथ रहने वाले या अमृत रूप
52पंचवक्त्रपांच मुखों वाले
53सदाशिवसर्वदा कल्याण करने वाले
54विश्वेश्वरसंपूर्ण विश्व के स्वामी
55वीरभद्रअत्यंत साहसी और वीर रूप
56गणनाथशिवगणों के स्वामी
57प्रजापतिप्रजा का पालन करने वाले
58हिरण्यरेतास्वर्ण तेज वाले
59दुर्धर्षजिन्हें पराजित करना असंभव हो
60गिरीशपर्वतों के राजा (कैलाशपति)
61गिरिशपर्वत पर शयन करने वाले
62अनघपाप रहित और पवित्र
63भुजंगभूषणसर्पों का आभूषण पहनने वाले
64भर्गपापों का भस्म करने वाले तेज
65गिरिधन्वामेरु पर्वत को धनुष बनाने वाले
66गिरिप्रियपर्वत प्रिय मानने वाले
67कृत्तिवासामृगछाला (छाल) पहनने वाले
68पुरारातिपुरों (दैत्यों के नगरों) का विनाशक
69भगवानसमस्त ऐश्वर्यों से पूर्ण
70प्रमथाधिपप्रमथ गणों के स्वामी
71मृत्युंजयमृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले
72सूक्ष्मतनुसूक्ष्म शरीर धारण करने वाले
73जगद्व्यापीजगत में समाए रहने वाले
74जगद्गुरुसंपूर्ण जगत के गुरु
75व्योमकेशआकाश रूपी केश वाले
76महासेनजनककार्तिकेय (महासेन) के पिता
77चारुविक्रमसुंदर पराक्रम वाले
78रुद्रदुखों को नष्ट करने वाले / उग्र
79भूतपतिसमस्त भूतों व जीवों के स्वामी
80स्थाणुस्थिर और अचल रहने वाले
81अहिर्बुध््न्यकुंडलिनी रूपी नाग के स्वामी
82दिगंबरदिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले
83अष्टमूर्तिआठ रूपों वाले (जल, अग्नि, वायु आदि)
84अनेकात्माअनेक रूपों में निवास करने वाले
85सात्विकसत्त्वगुण के प्रतीक
86शुद्धविग्रहशुद्ध और पवित्र शरीर वाले
87शाश्वतसदैव रहने वाले (अमर)
88खंडपरशुटूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
89अजजिनका कभी जन्म न हुआ हो
90पाशविमोचकमोह-माया के बंधनों से मुक्त करने वाले
91मृडसुख और संतोष देने वाले
92पशुपतिसमस्त जीवों (पशुओं) के संरक्षक
93देवस्वयं प्रकाशमान
94महादेवदेवों के भी देव
95व्ययपरिवर्तनशील संसार रूप
96हरसभी दुखों व पापों को हरने वाले
97पूषदंतभित्पूषा देव के दांत उखाड़ने वाले
98अव्यग्रकभी व्याकुल न होने वाले
99दक्षाध्वरहरदक्ष के यज्ञ का विध्वंस करने वाले
100हरदुखों का हरण करने वाले
101भगनेत्रभित्भग देव की आंखें फोड़ने वाले
102अव्यक्तजो इंद्रियों से व्यक्त न हो
103सहस्त्राक्षसहस्र (हजारों) आंखों वाले
104सहस्रपादसहस्रों पैरों वाले (सर्वव्यापी)
105अपवर्गप्रदमोक्ष प्रदान करने वाले
106अनंतजिनकी कोई सीमा न हो
107तारकसंसार रूपी सागर से तारने वाले
108परमेश्वरपरम नियंता और सर्वोच्च ईश्वर

महामृत्युंजय भाव:

“त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्यॉर्मुक्षीय माऽमृतात्॥”

भगवान शिव की भक्ति से मनुष्य के जीवन से भय, रोग और मृत्यु का संताप मिट जाता है और उसे परम शांति की प्राप्ति होती है।

मैं हेमराज मौर्य rajjansuvidha.in - jansuvidha portal का संस्थापक एवं संपादक हूँ। वर्ष 2020 से ब्लॉग लेखन का कार्य करता हूँ । यहाँ पर सरकारी योजनायें , Scholarships , Admissins ,Education, Online forms , Pan Card , Adhar Card , Voter Card,लेबर कार्ड, RTO ,शादी अनुदान योजना, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र,जन सेवा केंद्र एवं e-District आदि से जुडी लेटेस्ट जानकारी सरल हिंदी भाषा में साझा करता हूँ। इसके अलावा लेटेस्ट न्यूज़ updates भी साझा करता हूँ।जो कि विभिन्न स्रोतों से सटीक जानकारी प्राप्त करके साझा की जाती है।

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