सनातन परंपरा में भगवान शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि करुणा, कृपा और मुक्ति के परम स्रोत हैं। वे ‘आशुतोष’ हैं, जो मात्र एक लोटा जल और सच्चे हृदय के भाव से प्रसन्न हो जाते हैं। जब-जब सृष्टि पर या उनके भक्त पर कोई संकट या विघ्न आता है, भोलेनाथ ‘ संकट हरन ‘ और ‘विघ्नांतक’ बनकर ढाल की तरह खड़े हो जाते हैं।
समुद्र मंथन के समय जब संपूर्ण ब्रह्मांड कालकूट विष की अग्नि में जल रहा था, तब समस्त देवताओं और जीवों की रक्षा के लिए प्रभु शिव ने सहर्ष उस हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और ‘नीलकंठ’ कहलाए। वे स्वयं विष पीकर अपने बच्चों को अमृत प्रदान करते हैं—यही उनकी अनंत कृपालुता का प्रमाण है।
संकट हरन, बिघ्न टारन भगवान भोलेनाथ ,शिव के 108 नाम

संकट हरन, बिघ्न टारन भगवान भोलेनाथ ,शिव के 108 नाम —
१- ॐ भोलेनाथ नमः
२-ॐ कैलाश पति नमः
३-ॐ भूतनाथ नमः
४-ॐ नंदराज नमः
५-ॐ नन्दी की सवारी नमः
६-ॐ ज्योतिलिंग नमः
७-ॐ महाकाल नमः
८-ॐ रुद्रनाथ नमः
९-ॐ भीमशंकर नमः
१०-ॐ नटराज नमः
११-ॐ प्रलेयन्कार नमः
१२-ॐ चंद्रमोली नमः
१३-ॐ डमरूधारी नमः
१४-ॐ चंद्रधारी नमः
१५-ॐ मलिकार्जुन नमः
१६-ॐ भीमेश्वर नमः
१७-ॐ विषधारी नमः
१८-ॐ बम भोले नमः
१९-ॐ ओंकार स्वामी नमः
२०-ॐ ओंकारेश्वर नमः
२१-ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः
२२-ॐ विश्वनाथ नमः
२३-ॐ अनादिदेव नमः
२४-ॐ उमापति नमः
२५-ॐ गोरापति नमः
२६-ॐ गणपिता नमः
२७-ॐ भोले बाबा नमः
२८-ॐ शिवजी नमः
२९-ॐ शम्भु नमः
३०-ॐ नीलकंठ नमः
३१-ॐ महाकालेश्वर नमः
३२-ॐ त्रिपुरारी नमः
३३-ॐ त्रिलोकनाथ नमः
३४-ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
३५-ॐ बर्फानी बाबा नमः
३६-ॐ जगतपिता नमः
३७-ॐ मृत्युन्जन नमः
३८-ॐ नागधारी नमः
३९- ॐ रामेश्वर नमः
४०-ॐ लंकेश्वर नमः
४१-ॐ अमरनाथ नमः
४२-ॐ केदारनाथ नमः
४३-ॐ मंगलेश्वर नमः
४४-ॐ अर्धनारीश्वर नमः
४५-ॐ नागार्जुन नमः
४६-ॐ जटाधारी नमः
४७-ॐ नीलेश्वर नमः
४८-ॐ गलसर्पमाला नमः
४९- ॐ दीनानाथ नमः
५०-ॐ सोमनाथ नमः
५१-ॐ जोगी नमः
५२-ॐ भंडारी बाबा नमः
५३-ॐ बमलेहरी नमः
५४-ॐ गोरीशंकर नमः
५५-ॐ शिवाकांत नमः
५६-ॐ महेश्वराए नमः
५७-ॐ महेश नमः
५८-ॐ ओलोकानाथ नमः
५४-ॐ आदिनाथ नमः
६०-ॐ देवदेवेश्वर नमः
६१-ॐ प्राणनाथ नमः
६२-ॐ शिवम् नमः
६३-ॐ महादानी नमः
६४-ॐ शिवदानी नमः
६५-ॐ संकटहारी नमः
६६-ॐ महेश्वर नमः
६७-ॐ रुंडमालाधारी नमः
६८-ॐ जगपालनकर्ता नमः
६९-ॐ पशुपति नमः
७०-ॐ संगमेश्वर नमः
७१-ॐ दक्षेश्वर नमः
७२-ॐ घ्रेनश्वर नमः
७३-ॐ मणिमहेश नमः
७४-ॐ अनादी नमः
७५-ॐ अमर नमः
७६-ॐ आशुतोष महाराज नमः
७७-ॐ विलवकेश्वर नमः
७८-ॐ अचलेश्वर नमः
७९-ॐ अभयंकर नमः
८०-ॐ पातालेश्वर नमः
८१-ॐ धूधेश्वर नमः
८२-ॐ सर्पधारी नमः
८३-ॐ त्रिलोकिनरेश नमः
८४-ॐ हठ योगी नमः
८५-ॐ विश्लेश्वर नमः
८६- ॐ नागाधिराज नमः
८७- ॐ सर्वेश्वर नमः
८८-ॐ उमाकांत नमः
८९-ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः
९०-ॐ त्रिकालदर्शी नमः
९१-ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः
९२-ॐ महादेव नमः
९३-ॐ गढ़शंकर नमः
९४-ॐ मुक्तेश्वर नमः
९५-ॐ नटेषर नमः
९६-ॐ गिरजापति नमः
९७- ॐ भद्रेश्वर नमः
९८-ॐ त्रिपुनाशक नमः
९९-ॐ निर्जेश्वर नमः
१०० -ॐ किरातेश्वर नमः
१०१-ॐ जागेश्वर नमः
१०२-ॐ अबधूतपति नमः
१०३ -ॐ भीलपति नमः
१०४-ॐ जितनाथ नमः
१०५-ॐ वृषेश्वर नमः
१०६-ॐ भूतेश्वर नमः
१०७-ॐ बैजूनाथ नमः
१०८-ॐ नागेश्वर नमःv
यह भगवान भोलेनाथ के १०८ नाम केवल जप करने मात्र से ही सभी दुख,कष्ट, संकट दूर हो जाते है।
भगवान शिव के 108 पावन नाम और उनके कल्याणकारी अर्थ
शिव के प्रत्येक नाम में एक विशेष शक्ति और मंत्र का वास है। इनके नाम स्मरण मात्र से जीवन की बाधाएं, भय और संकट स्वतः दूर हो जाते हैं:
| क्र.सं. | नाम | पावन अर्थ |
| 1 | शिव | परम कल्याणकारी |
| 2 | महेश्वर | सभी देवों और ईश्वर के स्वामी |
| 3 | शंभु | सुख और आनंद के जन्मदाता |
| 4 | पिनाकी | पिनाक धनुष को धारण करने वाले |
| 5 | शशिशेखर | मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले |
| 6 | वामदेव | अत्यंत सुंदर स्वभाव वाले देव |
| 7 | विरूपाक्ष | विशेष (तीन) नेत्रों वाले |
| 8 | कपर्दी | जटाजूट धारण करने वाले |
| 9 | नीललोहित | नीले और लाल रंग वाले |
| 10 | शंकर | सबका कल्याण और मंगल करने वाले |
| 11 | शूलपाणि | हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले |
| 12 | खटवांगी | खटवांग (अस्त्र) धारण करने वाले |
| 13 | विष्णुवल्लभ | भगवान विष्णु के परम प्रिय |
| 14 | शिपिविष्ट | प्रकाश से आच्छादित रहने वाले |
| 15 | अंबिकानाथ | माता पार्वती के स्वामी |
| 16 | श्रीकंठ | सुंदर कंठ वाले |
| 17 | भक्तवत्सल | भक्तों से अत्यंत प्रेम करने वाले |
| 18 | भव | संसार रूप में प्रकट होने वाले |
| 19 | शर्व | समस्त पापों का नाश करने वाले |
| 20 | त्रिलोकेश | तीनों लोकों के स्वामी |
| 21 | शितिकंठ | सफेद/नीले कंठ वाले |
| 22 | शिवाप्रिय | मां पार्वती के अति प्रिय |
| 23 | उग्र | प्रचंड रूप धारण करने वाले |
| 24 | कपाली | कपाल (पात्र) धारण करने वाले |
| 25 | कामारी | कामदेव का मर्दन करने वाले |
| 26 | अंधकासुरसूदन | अंधकासुर दैत्य का वध करने वाले |
| 27 | गंगाधर | जटाओं में पवित्र गंगा को धारण करने वाले |
| 28 | ललाटाक्ष | मस्तक पर तीसरा नेत्र रखने वाले |
| 29 | कालकाल | काल (मृत्यु) के भी काल |
| 30 | कृपानिधि | दया और कृपा के सागर |
| 31 | भीम | भयंकर व विशाल रूप वाले |
| 32 | परशुहस्त | हाथ में फरसा धारण करने वाले |
| 33 | मृगपाणि | हाथ में हिरण को थामने वाले |
| 34 | जटाधर | घनी जटाओं को धारण करने वाले |
| 35 | कैलाशवासी | कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले |
| 36 | कवची | कवच धारण करने वाले |
| 37 | कठोर | दुष्टों के लिए अत्यंत कठोर |
| 38 | त्रिपुरांतक | त्रिपुरासुर का अंत करने वाले |
| 39 | वृषांक | ध्वज पर बैल का चिन्ह रखने वाले |
| 40 | वृषभारूढ़ | नंदी (बैल) की सवारी करने वाले |
| 41 | भस्मधूलितविग्रह | शरीर पर भस्म लगाने वाले |
| 42 | सामप्रिय | सामवेद के गान से प्रसन्न होने वाले |
| 43 | स्वरमयी | सातों स्वरों में निवास करने वाले |
| 44 | त्रयीमूर्ति | वेदत्रयी रूपी मूर्ति |
| 45 | अनीश्वर | जिनका कोई स्वामी न हो (स्वयं सर्वोच्च) |
| 46 | सर्वज्ञ | सब कुछ जानने वाले |
| 47 | परमात्मा | सर्वोपरि आत्मा |
| 48 | सोमसूर्याग्निलोचन | सूर्य, चंद्र और अग्नि रूपी तीन नेत्र वाले |
| 49 | हवि | यज्ञ की आहुति रूप |
| 50 | यज्ञमय | स्वयं यज्ञ स्वरूप |
| 51 | सोम | उमा के साथ रहने वाले या अमृत रूप |
| 52 | पंचवक्त्र | पांच मुखों वाले |
| 53 | सदाशिव | सर्वदा कल्याण करने वाले |
| 54 | विश्वेश्वर | संपूर्ण विश्व के स्वामी |
| 55 | वीरभद्र | अत्यंत साहसी और वीर रूप |
| 56 | गणनाथ | शिवगणों के स्वामी |
| 57 | प्रजापति | प्रजा का पालन करने वाले |
| 58 | हिरण्यरेता | स्वर्ण तेज वाले |
| 59 | दुर्धर्ष | जिन्हें पराजित करना असंभव हो |
| 60 | गिरीश | पर्वतों के राजा (कैलाशपति) |
| 61 | गिरिश | पर्वत पर शयन करने वाले |
| 62 | अनघ | पाप रहित और पवित्र |
| 63 | भुजंगभूषण | सर्पों का आभूषण पहनने वाले |
| 64 | भर्ग | पापों का भस्म करने वाले तेज |
| 65 | गिरिधन्वा | मेरु पर्वत को धनुष बनाने वाले |
| 66 | गिरिप्रिय | पर्वत प्रिय मानने वाले |
| 67 | कृत्तिवासा | मृगछाला (छाल) पहनने वाले |
| 68 | पुराराति | पुरों (दैत्यों के नगरों) का विनाशक |
| 69 | भगवान | समस्त ऐश्वर्यों से पूर्ण |
| 70 | प्रमथाधिप | प्रमथ गणों के स्वामी |
| 71 | मृत्युंजय | मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले |
| 72 | सूक्ष्मतनु | सूक्ष्म शरीर धारण करने वाले |
| 73 | जगद्व्यापी | जगत में समाए रहने वाले |
| 74 | जगद्गुरु | संपूर्ण जगत के गुरु |
| 75 | व्योमकेश | आकाश रूपी केश वाले |
| 76 | महासेनजनक | कार्तिकेय (महासेन) के पिता |
| 77 | चारुविक्रम | सुंदर पराक्रम वाले |
| 78 | रुद्र | दुखों को नष्ट करने वाले / उग्र |
| 79 | भूतपति | समस्त भूतों व जीवों के स्वामी |
| 80 | स्थाणु | स्थिर और अचल रहने वाले |
| 81 | अहिर्बुध््न्य | कुंडलिनी रूपी नाग के स्वामी |
| 82 | दिगंबर | दिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले |
| 83 | अष्टमूर्ति | आठ रूपों वाले (जल, अग्नि, वायु आदि) |
| 84 | अनेकात्मा | अनेक रूपों में निवास करने वाले |
| 85 | सात्विक | सत्त्वगुण के प्रतीक |
| 86 | शुद्धविग्रह | शुद्ध और पवित्र शरीर वाले |
| 87 | शाश्वत | सदैव रहने वाले (अमर) |
| 88 | खंडपरशु | टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले |
| 89 | अज | जिनका कभी जन्म न हुआ हो |
| 90 | पाशविमोचक | मोह-माया के बंधनों से मुक्त करने वाले |
| 91 | मृड | सुख और संतोष देने वाले |
| 92 | पशुपति | समस्त जीवों (पशुओं) के संरक्षक |
| 93 | देव | स्वयं प्रकाशमान |
| 94 | महादेव | देवों के भी देव |
| 95 | व्यय | परिवर्तनशील संसार रूप |
| 96 | हर | सभी दुखों व पापों को हरने वाले |
| 97 | पूषदंतभित् | पूषा देव के दांत उखाड़ने वाले |
| 98 | अव्यग्र | कभी व्याकुल न होने वाले |
| 99 | दक्षाध्वरहर | दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करने वाले |
| 100 | हर | दुखों का हरण करने वाले |
| 101 | भगनेत्रभित् | भग देव की आंखें फोड़ने वाले |
| 102 | अव्यक्त | जो इंद्रियों से व्यक्त न हो |
| 103 | सहस्त्राक्ष | सहस्र (हजारों) आंखों वाले |
| 104 | सहस्रपाद | सहस्रों पैरों वाले (सर्वव्यापी) |
| 105 | अपवर्गप्रद | मोक्ष प्रदान करने वाले |
| 106 | अनंत | जिनकी कोई सीमा न हो |
| 107 | तारक | संसार रूपी सागर से तारने वाले |
| 108 | परमेश्वर | परम नियंता और सर्वोच्च ईश्वर |
महामृत्युंजय भाव:
“त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्यॉर्मुक्षीय माऽमृतात्॥”
भगवान शिव की भक्ति से मनुष्य के जीवन से भय, रोग और मृत्यु का संताप मिट जाता है और उसे परम शांति की प्राप्ति होती है।
